आर्यन खान ड्रग्स मामले को लेकर एनसीबी के जोनल डायरेक्टर समीर वानखेडे कार्यशैली पर लगातार प्रश्नचिन्ह लगते जा रहे हैं. रातो रात आर्यन खान जैसे हाई प्रोफाइल व्यक्ति का केस हैंडल करने वाले समीर वानखेडे देश और दुनिया के लिए हीरो बन गए लेकिन अब धीरे-धीरे उनकी छवि गर्त में चली जा रही है.

और उन पर राजनीतिक पार्टी के नेता नवाब मलिक तो आरोप लगा ही रहे हैं. वहीं उनके खिलाफ अब महाराष्ट्र सरकार भी आ चुकी है. पिछले काफी दिनों से आर्यन खान के ड्रग्स केस तो बखूबी वाकिफ होंगे लेकिन किसी ने नहीं सोचा था कि आर्यन खान केस का निरीक्षण करते करते समीर वानखेड़े एक दिन खुद परेशानियों के घेरे में आ जाएंगे.

समीर वानखेडे के लिए अब वह समय आ चुका है जब उनके सामने सरकार सीना ताने खड़ी है. समीर वानखेड़े को आर्यन खान ड्रग्स मामले से तो अलग कर ही दिया गया है. वहीं इसके अलावा पांच और मामलों से समीर वानखेड़े को अलग कर दिया गया है. दरअसल, पहले समीर वानखेडे इन 5 मामलों की भी इनवेस्टीगेशन करने वाले थे लेकिन सरकार के द्वारा उन पर गाज गिर चुकी है. इस मामले का अंतरराष्ट्रीय स्तर पर खासा महत्व देखने को मिल रहा है. वर्षों पहले साहिर लुधियानवी ने मुंबई के बारे में लिखा था- “ये वो मायावी नगरी है जो तुझे फर्श से अर्श पर तो ले जायेगी लेकिन जब वो नीचे गिरायेगी तो यहीं पर फर्श तलाशना भी तेरे लिए दुश्वार हो जाएगा.

समीर वानखेड़े के साथ भी कुछ ऐसा ही दिखता नजर आ रहा है. लिहाजा यह कहना गलत नहीं होगा कि समीर वानखेड़े को इस केस से अलग करना नवाब मलिक की साफ तौर पर जीत है. ध्यान देने वाली बात यह है कि मंत्री नवाब मलिक द्वारा वानखेड़े पर जबरन उगाही करने और भ्रष्टाचार के आरोपों को लेकर एनसीबी की विजिलेंस टीम के अलावा मुंबई पुलिस भी अपनी जांच कर रही है.

इसी जांच में अपनी संभावित गिरफ्तारी से बचने के लिए वानखेड़े ने पिछले महीने बॉम्बे हाइकोर्ट की शरण ली थी कि इस जांच पर रोक लगाई जाए. लेकिन कोर्ट ने इसे ठुकराते हुए उन्हें सिर्फ इतनी राहत दी थी कि पुलिस कोई भी सख्त कार्रवाई करने से पहले उन्हें 72 घंटे का नोटिस देगी.