बॉलीवुड इंडस्ट्री के सबसे पहले सुपरस्टार राजेश खन्ना को माना जाता है. उन्होंने अपने फिल्मी करियर के दौरान एक से बढ़कर एक सुपरहिट फिल्में दी हैं. राजेश खन्ना ने अपने जमाने में बॉलीवुड की बड़ी से बड़ी और सुंदर अभिनेत्रियों के साथ काम किया है. इन सुंदर अभिनेत्रियों में जयाप्रदा का नाम भी शामिल है.

जयाप्रदा वैसे तो उम्र में राजेश खन्ना से 20 साल छोटी थी लेकिन इन दोनों ने एक साथ कई फिल्में की हैं और लोग भी इन दोनों की जोड़ी को काफी ज्यादा पसंद करते थे. और यही कारण है कि इनकी फिल्में काफी हिट हुआ करती थी. लेकिन क्या आपको पता है कि राजेश खन्ना ने एक बार जयाप्रदा को 2 घंटे एक ही कमरे में बंद कर दिया था. उन्होंने जया को कमरे में क्यों बंद किया था यह किस्सा बड़ा ही दिलचस्प है.

दरअसल, 1984 में राजेश खन्ना फिल्म मकसद में काम कर रहे थे इस फिल्म में राजेश खन्ना के साथ जयाप्रदा जितेंद्र और श्रीदेवी भी मुख्य भूमिका में थीं. श्रीदेवी और जयाप्रदा की आपस में कभी भी नहीं बनती थी। इन दोनों के बीच छत्तीस का आंकड़ा था. यह दोनों एक दूसरे को देखना भी पसंद नहीं करते थे. इसीलिए इन दोनों के बीच आए दिन कैटफाइट चला करती थी.

हैरत की बात तो यह है कि इन दोनों ने एक साथ कई फिल्में की है लेकिन इन सबके बावजूद भी इन दोनों की आपस में कभी नहीं बनती थी. दोनों एक साथ एक ही फिल्म के सेट पर होते हुए भी आपस में कभी बात ही नहीं करती थीं. मकसद फिल्म के सेट पर यह दोनों एक दूसरे से काफी नाराज थी और वही चीज राजेश खन्ना को अच्छी नहीं लग रही थी.

ऐसे में राजेश खन्ना और जितेंद्र ने मिलकर एक प्लान तैयार किया. उन्होंने इस प्लान के तहत जयाप्रदा और श्रीदेवी को एक साथ एक कमरे में 2 घंटे के लिए बंद कर दिया. इन दोनों ने सोचा कि अगर यह दोनों अभिनेत्रियां एक साथ एक कमरे में बंद रहेंगी तो शायद आपस में बात करने लगे इसलिए इन्होंने यह प्लान बना कर इन दोनों को मेकअप रूम में बंद कर दिया था. 2 घंटे बाद जब रूम का दरवाजा खोला गया तो अंदर का नजारा देखकर राजेश खन्ना और जितेंद्र हैरान हो गए.

दोनों ने रूम में 2 घंटे बंद होने के बावजूद भी आपस में बातचीत नहीं की थी. दोनों कमरे के अलग-अलग कोने में बैठी थी. बता दें कि इन दोनों ने अपने फिल्मी करियर की शुरुआत साउथ फिल्म इंडस्ट्री से की थी और वहीं से यह दोनों एक दूसरे को प्रतियोगी मानते थे. दोनों सुपरस्टार ने वहीं से एक बॉलीवुड की तरह अपना रुख मोड़ा था और यहां भी इन्होंने एक दूसरे को अपनी प्रतियोगी की तरह ही माना था.