एक्टर मनोज बाजपेयी का जन्म और शुरूआती पढ़ाई लिखाई बिहार के एक बहुत छोटे से गांव में हुई है. आज मनोज फिल्म इंडस्ट्री में सफलता के शीर्ष पर हैं. हालांकि, इस सफलता के पीछे उनकी जीतोड़ मेहनत और अंतहीन संघर्ष की कहानी छिपी हुई है. आज के इस आर्टिकल में आइए जानते हैं मनोज के संघर्ष के दिनों से जुड़े कुछ किस्से…

मनोज बाजपेयी ने नेशनल स्कूल ऑफ़ ड्रामा के लिए टेस्ट दिया था. हालांकि, शुरुआत में उनका यहां सिलेक्शन नहीं हो पाया था. ख़बरों की मानें तो रिजेक्शन के बाद मनोज सुसाइड करने के करीब पहुंच गए थे. कहते हैं कि कहीं वह सच में सुसाइड ना कर लें, इस डर से उनका एक दोस्त हर दम उनके साथ रहता था. आपको बता दें कि कुछ प्रयासों के बाद मनोज बाजपेयी का एडमिशन नेशनल स्कूल और ड्रामा में हो गया था.

एक इंटरव्यू के दौरान मनोज बाजपेयी ने मुंबई में अपने शुरूआती दिनों को याद करते हुए बताया था एक बार किसी असिस्टेंट डायरेक्टर ने उन्हें रिजेक्ट करते हुए उनकी फोटो तक फाड़कर फेंक दी थी. मनोज के अनुसार यह तब की बात है जब वह फिल्मों में रोल पाने के लिए संघर्ष कर रहे थे और मुंबई की ही एक चॉल में 5 लोगों के साथ रहते थे. उन दिनों वह अक्सर एक से दूसरे स्टूडियो के चक्कर काटा करते थे.

मनोज बताते हैं कि उन्हें शुरुआत में हर कदम पर रिजेक्शन का सामना करना पड़ा था. मनोज के अनुसार एक बार किसी एड फिल्म की शूटिंग से उन्हें बाहर तक निकाल दिया गया था. ख़बरों की मानें तो मनोज के पास उस दौरान में पेट भरकर खाना खाने तक के पैसे नहीं बचते थे और वह मुश्किल से वडापाव खाकर गुज़ारा किया करते थे. चार सालों की स्ट्रगल के बाद मनोज को एक टीवी सीरियल में रोल मिला जिससे उन्हें 1500 रुपए प्रति एपिसोड की कमाई होने लगी. इसके बाद मनोज धीरे-धीरे लोगों की नज़र में आना शुरू हुए. वहीं फिल्म ‘सत्या’ ने मनोज को रातों रात इंडस्ट्री का एक बड़ा सितारा बना दिया. आपको बता दें कि मनोज बाजपेयी आज ना सिर्फ बॉलीवुड की मेनस्ट्रीम फिल्मों बाकि ओटीटी प्लेटफ़ॉर्म पर भी बड़ा नाम हैं.