बॉलीवुड इंडस्ट्री में बहुत सारे ऐसे अभिनेता हैं जो शराब और नशीली चीजों से हाथ भी नहीं लगाते हैं लेकिन जब उन्होंने फिल्मी पर्दे पर एक शराबी का किरदार निभाया तो उन्होंने पूरी महफिल को अपने नाम कर लिया जब उन्हें पर्दे पर इस हाल में देखा गया तो सब उन्हें देखते ही रह गए हम बात कर रहे हैं.

70 और 80 के दशक के मशहूर कॉमेडियन रहे जॉनी वॉकर के बारे में, जॉनी वॉकर ने अपनी बेहतरीन एक्टिंग और अपने कॉमिक अंदाज के लिए 70 और 80 के दशक में खूब लोगों को दीवाना बनाया था.

11 नवंबर 1926 को मध्यप्रदेश के इंदौर जिले में जन्मे जॉनी वॉकर की शुरुआती हालत बेहद खराब हुआ करती थी और बचपन से ही इन्होंने काम करना शुरू कर दिया था. वहीं जब उनका पालन पोषण इंदौर में नहीं हुआ तो इनका परिवार मुंबई में काम की तलाश में शिफ्ट हो गया, जॉनी वॉकर का असल नाम बदरुद्दीन जमालुद्दीन काजी था.

जब वह एक्टिंग की दुनिया में आए तो एक्टर गुरुदत्त ने उनका नाम बदल दिया था. उम्दा कॉमेडियन रहे जॉनी वॉकर ने काफी समय तक बस कंडक्टर के रूप में भी काम किया था और सबसे दिलचस्प बात यह है कि जॉनी वॉकर ने फिल्मों में आने के लिए किसी भी तरह की ट्रेनिंग नहीं ली बल्कि वह तो बस कंडक्टर का काम करते थे.

लेकिन आज इस बस कंडक्टर की जिंदगी बदलने वाली थी क्योंकि उस दिन इनकी बस में बलराज साहनी सफर कर रहे थे और उसी दौरान जॉनी वॉकर शराबी के रोल में सवारियों का मनोरंजन कर रहे थे, और उस समय बलराज साहनी गुरुदत्त के लिए बाजी फ़िल्म लिख रहे थे.

उन्होंने ही पहली बार जॉनी को गुरु दत्त से मिलवाया था. जब जॉनी वॉकर ने गुरुदत्त के सामने एक्टिंग की काला दिखाई तो वहीं से काफी प्रभावित हुए और इस फिल्म में उन्हें रोल दे दिया गया. दिलचस्प बात यह है कि जब जॉनी वॉकर पहली बार उनके सामने पहुंचे तो गुरुदत्त को लगा कि यह शराब पीकर एक्टिंग कर रहा है. लेकिन जब पता चला कि यह शराबी की एक्टिंग बिना शराब पिए कर रहा है तो वह काफी इंप्रेस हुए.

और यहीं से जॉनी वॉकर का फिल्मों का सिलसिला चल पड़ा इसके बाद उन्होंने पीछे मुड़कर नहीं देखा और हिंदी सिनेमा की सुपर हिट फिल्मों ‘आर-पार’, ‘प्यासा’, ‘चौदहवीं का चांद’, ‘कागज के फूल’, ‘मिस्टर एंड मिसेज 55’ में काम किया. जॉनी वॉकर ने अपने फिल्मी सफर में तकरीबन 300 फिल्में की थी.  यह महान शख्सियत 29 जुलाई 2003 को इस दुनिया को अलविदा कह गए आज भी इनकी एक्टिंग को काफी याद किया जाता है.