भारतीय हिंदी फिल्मों के बादशाह के रूप में जाने वाले अशोक कुमार का जीवन एक बहुत ही चुनौतीपूर्ण रहा है. अशोक कुमार ने अपने जीवन में बहुत कठिनाइयों का सामना भी किया है और यही कारण है कि अशोक कुमार कभी भी अपने परिस्थितियों के आगे झुके नहीं, वह लगातार ऊंचाइयों को चुनते रहे और अपने कर्तव्य मार्ग पर डटे रहे.

Ashok Kumar movies, filmography, biography and songs - Cinestaan.comबता दें कि अशोक कुमार का जन्म एक गरीब परिवार में हुआ था इनके पिता जी एक छोटे से वकील थे, अशोक कुमार 50 के दशक के ऐसे हीरो थे जिनके जैसा शायद किसी भी दशक में नहीं हुआ है. अशोक कुमार ने भारतीय हिंदी फिल्मों में अपना परचम इस कदर लहराया था कि उनका मुकाबला किसी और के साथ हो ही नहीं सकता था.

अशोक कुमार का बचपन भी काफी चुनौतीपूर्ण बीता है, अशोक कुमार ने बॉलीवुड में अपनी तमाम फिल्मों के जरिए लोगों के जीवन को भी प्रेरणादायक बनाने में मदद किया है. अशोक कुमार को दो दो बार सर्वश्रेष्ठ अभिनेता के फिल्म फेयर अवार्ड से भी नवाजा गया है, वहीं उन्हें 1988 में हिंदी सिनेमा के सर्वश्रेष्ठ पुरस्कार दादा साहब फाल्के पुरस्कार से भी नवाजा गया था.

Remembering dada moni Ashok Kumar on his 18th death anniversary. | by  Bollywoodirect | Mediumअशोक कुमार छह दशक तक अपने बेमिसाल अंदाज और अभिनय से अपने फैंस और दर्शकों के दिल पर राज करते रहे थे. अशोक कुमार उन तमाम अभिनेताओं में से एक थे जिसने हिंदी फिल्म इंडस्ट्री के विकास में बढ़-चढ़कर भूमिका निभाया था. लेकिन क्या आपको पता है अशोक कुमार बॉलीवुड इंडस्ट्री में आने से पहले वह एक बॉम्बे टॉकीज नामक लैब में असिस्टेंट का काम किया करते थे.

जी हां फिल्मों में आने से पहले अशोक कुमार लैब में असिस्टेंट हुआ करते थे. एक छोटे से लैब अस्सिटेंट से इतने बड़े मुकाम का सफर अशोक कुमार जब भी बताते थे, तब वो मुस्कुरा दिया करते थे.

अशोक कुमार के जन्मदिन पर हुई थी किशोर कुमार की मौत, गम में नहीं मनाते थे  जश्नअशोक कुमार भले ही अब इस दुनिया में ना हों लेकिन उनकी फिल्में आज भी लोगों के दिलों पर राज करता है. और उनकी कुछ ऐसी फिल्में जिन्हें शायद आपको जरूर देखना चाहिए जैसे कि – जमला हो जमला, मेरा दामाद, यूंही कभी, आंसू बने अंगारे,  हमला, मौत की सजा, ममता की छांव में, क्लर्क,  अनजाने रिश्ते और दाना पानी.