अगर आप हिंदी सिनेमा की फिल्में देखने के शौकीन हैं तो इन फिल्मों में विलेन के बिना कहानी अधूरी मानी जाती है. जितना किसी एक्टर का किरदार दमदार होता है उतना ही दमदार विलेन का किरदार भी दिखाया जाता है. आज के इस आर्टिकल में हम आपको 80 और 90 के दशक के विलेन इंस्पेक्टर गोडबोले उर्फ सदाशिव अमरापूरकर (Sadashiv Amrapurkar) के बारे में बताने वाले हैं. इन्होंने अपनी गजब की एक्टिंग की बदौलत खूब लोकप्रियता हासिल की थी, और उस समय ये बॉलीवुड इंडस्ट्री की खूंखार विलेन की लिस्ट में शामिल किए जाते थे.साल 1950 महाराष्ट्र के अहमदनगर में जन्मे सदाशिव को बचपन से ही एक्टिंग में कैरियर बनाने का फितूर सवार था और बताया जाता है कि इसके लिए उन्होंने अपनी पढ़ाई तक को भी छोड़ने का मन बना लिया था. इसके साथ ही वह जब पढ़ाई कर रहे थे तब उन्होंने थिएटर ज्वाइन कर लिया.

इनके बॉलीवुड करियर की बात करें तो उन्होंने साल 1983 में आई फिल्म अर्धसत्य से बॉलीवुड डेब्यू किया था और इस फिल्म के बाद इन्हीं बेस्ट सर्पोटिंग एक्टर का अवार्ड भी दिया गया था इसके बाद तो उन्होंने कभी पीछे मुड़कर नहीं देखा.और कई सारी सुपरहिट फिल्मों में बेहतरीन किरदार निभाए.

लेकिन सबसे ज्यादा लोकप्रियता सदाशिव को बॉलीवुड फिल्म “आंखें” से मिली थी इस फिल्म में उन्होंने एक इंस्पेक्टर का किरदार निभाया था. यह संयोग की बात है कि इंस्पेक्टर गोडबोले ने अपने करियर के दौरान 25 से ज्यादा फिल्मों में इंस्पेक्टर के किरदार निभाए हैं.

यह भी पढ़ें – संजीव कुमार ने ठुकरा दिया इस एक्ट्रेस का मैरिज प्रपोजल, ज़िंदगीभर शादी ना करने के बाद अब ऐसी हो गई हालत

सदाशिव ने अपने कैरियर के दौरान गुप्त,इश्क, रंजीत राय,इंस्पेक्टर नीलकंठ जैसी फिल्मों में काम किया है. वहीं इनकी आखिरी फिल्म साल 2013 में बॉम्बे टॉकीज़ थी. वहीं 3 नवंबर 2014 को फेफ़ड़ों में सूजन होने के कारण इनकी हातल गंभीर हुई, और इन्हें अस्पताल में भर्ती करया गया. इसी दौरान इन्होंने इश दुनिया का अलविदा कह दिया.

यह भी पढ़ें- पिता की दर्दनाक मौत देख ऐसी हो गई थी शाहरुख की हालत, कहा – मैं पिता की तरह नहीं मरना चाहता हूं